10 HINDI BOOKS RELATING TO «आपूपिक»
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आपूपिक in the following bibliographical selection. Books relating to
आपूपिक and brief extracts from same to provide context of its use in Hindi literature.
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Laghu-siddhānta-kaumudī - Volume 5
आपूपिक: आम्रमयन् आसर आश्य: आश्वपतम् आश्यक्त: उसका आहित इध्याकव : इत: इत्थम् इयान इष्ट. इह इहत्य: उचकै: उ-मसाम: (तरु:) उच्चीस्तमाम् उडुलोमा: उदी-यम् उभयम् उपर ऊरुदष्टनम् ऊरुश्यसम् ...
Varadarāja, Bhīmasena Śāstrī, 1920
2
Pratyayakośaḥ - Page 170
शु-मकशाला-था अवकेय: शौत्कज्ञालिक: (1.50, तजि: :: "तदस्य पययन्" (जिय-प्रा) इत्यर्थ आपूपिक: अस्य अभी: पण्यमच । तनि: :- "तदस्य शिल्पम प्र, (जिय-की मृदत्ग: शिल्प. आय मसत्गक: । वैणिक: : पाशविक: ...
3
Amarkosha-Amarsingh Virachit ( Vishwanath Jha) Sampurna
आपूपिक: कान्दविको भक्ष्यकार इने दिस हैं२८.। अश्यन्तमुद्धानमधिश्रयणी चुहिलरन्तिका है सकट: ( कटति इने अबू ) विकि-जक: ( विवप्रनिति इनूतस्य कि-पदु यम: किलेजति: इति अ: घूणेदरादि:, उभी ...
4
Laghusiddhaantkaumudi Shrivardaraajpraneeta ...
प्रयोक्ता भापार्श: स्कू० ११२३ मर्मधिक--मृदङ्ग बजानेवाला । स्कू० ११२४ आसिम-तलवार से लड़नेवालर्श । धानुष्क:--धनुर्मारी । । सहीं ११२५ आपूपिक--पूदी खानेवाला । प० ११२६ मैंअंटेक:--याम का ...
Vishwanaath Shaastri, Parishishtkar Shastri, Lakshminarayan Shastri, 2009
5
Vachaspatya, a comprehensive Sanscrit Dictionary: In 10 ...
तत् परमख ठक 1 आपूपिक: । अपूविक्रेतरि त्रि ० । अपूपादि श० ६ब० । पाणिन्यु के हितार्थ ब्यतोः प्रकृति भूते शबदसमूडे । सन् च गणः "अपू तगडुल, अभ्यू, अथोष, अबोध अध्येष, घुघुक, चोदन, रूप, पूप, ...
Tārānātha Tarkavāchaspati, 1873
6
Prācīna Bhāratīyoṃ kī khāna-pāna vyavasthā
ते-वहीं, ३९७ २० आपूपिक: कान्दविको भक्षकार: । --अमरकोष, २न्९.२७ ३. सतीशचन्द काला, मोहनजी-ड: तथा सिन्धु सभ्यता, अध्याय, ३, पृ० ४१ । उ. गोविन्दचन्द्र राय, प्राचीन भारतीय मिट्टी के बर्तन, पृ० ...
7
A critical study of siddha Hema śabdānuśāsana
इन्हें सहयोग और सहकारिता के आधार पर अम में सहयोग देना पग: था : आपूपिक (की ४ । ७०)---पुओं के भोजन पर काम करनेवाला सहयोगी-मिक है शास्कृलिक--स्था ४।७ ०)---शाकुली के भोजन पर काम ...
... o प्रानन्दन २ \9 प्रानर्त ३ ६४ आपत्प्राप्त १ ४२ प्रापrन १ ४२ आपूपिक २ ३९ आप्रच्छन्न २ \9 आमलक ५ ३३ प्रामिष ३ २२४ प्रामिषाशिन् १ १९ प्रामोद ३ ९१ आम्नाय २ \9 प्रायत १ ६९ प्रायति ३ ७२ प्रायत्ता ...
9
Prācīna Bhārata kā sāmājika itihāsa - Page 542
शध्यानुशासन, 6.1.158. वही, 6.4.16, क्रयविक्रयेश जीवति क्रयविक्रविक: है वहीं, 6.5.54; पण्य. विक्रेय" अति । आत्मा: पययमस्य आपूपिक: [ वहीं, 6.4.55; 6.4.50. वही, 6.4.167, द्रव्य, हरति, वहति, आवहति ययक: ।
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Senānī Pushyamitra: Maurya-sāmrājya ke hr̥āsakāla kā ...
पश्यशालाएं भारत औदनिक, पकामांसिक, आपूपिक और पक्यान्नपश्य आदि के वैसे ही भोजनालय के रेशमी और सूती वय, सुगन्धियों और अपनों से परिपूर्ण थी । २० : सेनानीपुपमत्र प्रगती पर्षन्त्त ...
Satyaketu Vidyalankar, 1973