WHAT DOES आसेवा MEAN IN HINDI?
Click to
see the original definition of «आसेवा» in the Hindi dictionary.
Click to
see the automatic translation of the definition in English.
Definition of आसेवा in the Hindi dictionary
Asseva noun female 0 [NO 0] giving 0 'ASAVAN' [TO 0]. आसेवा संज्ञा स्त्री० [सं०] दे०
'आसेवन' [को०] ।
Click to
see the original definition of «आसेवा» in the Hindi dictionary.
Click to
see the automatic translation of the definition in English.
10 HINDI BOOKS RELATING TO «आसेवा»
Discover the use of
आसेवा in the following bibliographical selection. Books relating to
आसेवा and brief extracts from same to provide context of its use in Hindi literature.
1
Aṣṭādhyāyī-bhāṣya-prathamāvṛtti: Lekhaka Brahmadatta Jitjñāsu
व्यगी में-गेहानुप्रवेशमात्ते (घर तो में प्रवेश करके रब है) (ममास पक्ष के सब उदाहरण संस्कृत भाग के अनुसार जानते जावें : आसेवा में--गेहानुप्रवेशमाझे (घर में प्रवेश कय के रहता है) ...
Pāṇini, Brahmadatta Jijñāsu, Yudhiṣṭhira Mīmāṃsaka, 1964
2
Kāśikā: Pāṇinīyāṣṭādhyāyīsūtravr̥ttiḥ - Volume 5
... प्रतिक: कण--प्रतिम: इसका ग्रहण नहीं होता है । ] ।। ४० ।। 'धर्म' शब्द जो 'दि यह द्वितीयक" है, उससे 'चरति' ( 22: आवरण करता है ) इस अर्थ में ठकूप्रत्यय होता है : 'चरति' यह आसेवा श- पुन: पुन: करना अर्थ ...
Vāmana, Jayāditya, Sudhākara Mālavīya, 1988
3
Vyākaranacandrodava - Volume 2
गेहमनुप्रपातमनुप्रपातमास्ते है गेहमनुप्रपादमनुप्रपादमासी है गेहमबस्कन्दमवस्कन्दमास्ते है समास पक्ष में व्याप्ति और आसेवा (=८नावृत्ति, नित्यताव्य-बार-बार करना) के समास से ...
4
R̥gvedaḥ: Sa ca padapāṭhena ca yathopalambaṃ ... - Volume 1
दुगु: । भूरि' । दु-सिट भव' । हिश्वहेजा।यु: । धुरुर्ण: । -स्यापाए 0 ४ " स्काद० तए (वा नर: मदुन्या: दमे यशगृहे नित्यपू इद्धए सम' है ओने. चना सरल रतुविपविभिबच६ आसेवा-ते : किस (1वाल 'क्षिति:' ( निध १ ...
Skandasvamīn, Udgīthācāryya, Mādhava (son of Veṅkaṭārya.), 1965
5
Vakyapakiya-sambandhasamuddesa
परन्तु सभी दार्शनिक सम्प्रदाय ऐसे असाधारण पुरुषों की सता भी स्वीकार करते हैं, जिनके अन्तरण के रजोगुण और तमोगुण के मल-रूपी आवरण अभ्यास और वैराग्य की आसेवा से नष्ट हो गए हैं और ...
6
Śr̥ṅgāramañjarī-saṭṭakam
... वामनेत्रमपि । अनयो: ओरम: स्मृरणेन जीविताशा सऊजाता : अलं सन्देहेन । यत: त्वं रागों वसन्तसमयोपुय मन्मयो वा स तत्र भवति कथ. रहितप्रभाव: ।हे १, आसेवा । ६ जाद० तृतीयं जवनिकान्तरन् ८ १.
Viśveśvara, Jagannātha Jośī, 1990
7
Siddhantakaumudi nama Bhattojidiksitapranita ...
आसेवा हि खारसिको प्रवृति । एवं हैववशादधर्म प्रधुत्तो य: सदत अधार्मिक इति गोव्यते ।।--प्रतिपद्यभिति । बीप्यायामाभिमुरूये वा अव्ययं-भाव: । "ऋ'-' इति समासान्त: प्र-समजारू----------- ...
8
Sarvārthasiddhiḥ: Śrīmadācāryagr̥ddhapicchapraṇītasya ...
५ विरुद्ध-य सकृदुपभोग: सेवा, पुन: पुनरुपभोग आसेवा पध्यापध्याहारसेववं वैषम्बन । [ ८३२ ब८८८द्ध अमन तो जा ब-ब बम म ( हैं ८३३ ३२६. २ चिरोधितब्रह्मचर्धस्य चिरतपरिवन: : प्रत्यग्र९जा झटितिपुना ...
Devanandī, Phūlacandra Siddhāntaśāstrī, 1971
9
Khaṇḍadeva Bhāvaprakāśaḥ: Mahāmahopādhyāya ... - Page 361
... 1-3-4ही इति सूवार 'गोद-गवई या आब: हैं य-शभी यर इब बठीसशतम्बी: आयुक्त: 1: व्यस्था-: है विषय-म्य: (बतायी पक्षे यत्९ठी विधीयते: आसेवा र तवेकयरत्ववड़ा अभागे 'अमल गो: "श-कटेन' ईषद्यवक्त इ-: ।
Peri Sūryanārāyaṇa Śāstrī, 1985
कुशली निपुण: । आ सम्यक सेवा आसेवा तत्परता एकपरायणता इत्यर्थ:, तसिमन् आसेवायात् । तत्परता एव तात्पर्यम् इत्युकां वृत्त" । र आब प्रद, अर्थ, यूजियोंगे । आयुक्त: ईषेद युक्त इत्यर्थ: ।
Bhaṭṭojī Dīkṣita, Pāṇini, Mohan Vallabh Pant, 1965