WHAT DOES अवियोग MEAN IN HINDI?
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Definition of अवियोग in the Hindi dictionary
Unfair 1 term noun [NO] 1. Lack of disconnection Present 2. a coincidence . Solder 1. Unusual. Which should not be disconnected. 2. Joint Convergent Unified Yu0-Avivagavata. = According to Kalki Purana, a fasting Shukla Tritiya falls. This day women bath The moon drinks and drinks the milk of the night. This fast lucky is believed . अवियोग १ संज्ञा पुं० [सं०]
१. वियोग का अभाव । उपस्थित । २.
संयोग । मिलाप ।
अवियोग २ वि०
१. वियोगशून्य । जिसका वियोग न हो । २. संयुक्त
संमिलित । एकीभूत ।
यौ०-अवियोगव्रत.=कल्कि पुराण के अनुसार एक व्रत जो अगहन
शुक्ल तृतीया को पड़ता है । इस दिन स्त्रियाँ स्नान कर
चंद्र दर्शन करके रात की दूध पीती है । यह व्रत सौभाग्यप्रद
माना जाता है ।
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10 HINDI BOOKS RELATING TO «अवियोग»
Discover the use of
अवियोग in the following bibliographical selection. Books relating to
अवियोग and brief extracts from same to provide context of its use in Hindi literature.
1
Antarpatha ke yåatråi åAcåarya âSråi Nåaneâsa
(४) काम-भोग अवियोग चिन्ता है ( : ) अनिष्ट वस्तु का संयोग स-जब अनिष्ट वस्तु का संयोग हो तब तदभव दुख से व्यायाकुल आत्मा उसे दूर करने के लिये जो निरन्तर चिंता करती है, वह अनिष्ट वस्तु ...
2
Bhāratīya kāvyasamīkshā meṃ vakrokti siddhānta
... शब्द-संबंध-शक्ति | इन आठो संबंधी पर भोज सप्तम और अष्टम प्रकाश में विचार करते हैं है शोर सरों यय शोर चार काव्यमूलक विभावन-दोस्तन गुणीपादान अलंकारयोग और रस अवियोग पर विचार करने ...
Vijendra Nārāyaṇa Siṃha, 1984
3
Tiruvalluvara kī vāṇī - Page 117
(1- निज वांछित अभियोग हैं फैलाते पुर-लीग है न प्रेमी-शन सह-गमन में, देगा ही सहयोग ।। पातिव्रत बम हिप ताप की अमहबता ए किम से--1. यदि-हो अब अवियोग तो, मुझे बताया जाय । ओर जनों को फिर ...
सित्रयों के अवैधव्य तथा पुरुषों के अवियोग (पत्नी से अवियोग) के लिए यह वत अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है । इसमें भगवान से यह प्रार्थना की जाती है : लक्षण न पत्रों वरद यथा ते शयन- सदा । शम्या ...
5
Prācīna Bhārata meṃ Śakti-pūjā - Page 346
अवियोग अभी (भाद्रपद शुक्ल 12)- उथवत है । इसमें शिव एवं गौरी, ब्रह्मा एवं सावित्री, विष्णु एवं लक्ष्मण तथा सूर्य एवं उनकी पत्नी निक्षुभा की पूजा होती है : अवियोग व्रत यत अविल-तृतीया ...
6
Hindi Riti Sahitya - Page 87
... ग्रन्थ 'श्रृंगार प्रकाश' में रस का गम्भीर दार्शनिक विवेचन किया है । भोज के विचार से रस एक हैश्रृंगार तथा काव्य में गुण के समान रस का अवियोग भी नित्य है 1 उस की पहली अवस्था अतर है ...
7
Vaiyakaran Mahabhashya--Bhagavatpatanjali Virchit Navahanvik
... समाहार इन्द्र है-श-रच, अलि, संबन्ध-ति शध्यार्थसम्बन्धसू, अद शपर्थसम्बधि : तीनों का विकालाध्याधित ( नित्य ) अवियोग दिखाने के अथ सिद्धये-सय क: पद": : नि-पर्यायवाची सिद्धश१ज्ञा: ।
8
Ashtanghridayam Of Shrivagbhattavirachitam Sarvangsundri ...
सम्यक-, योग का लक्षण-हले" के लक्षणों के विपरीत लक्षण होना । देखिये विक ३२ का वत्सं-य । अवियोग का लक्षण-विकी में क्रमश: पुरीष, मिव कफ एवं वायु निकल जाने पर ब-कफ मिल रहित, कि होना और ...
... इनकी कोई खोज-खबर नहीं करता : ( इस प्रकार ) ( है प्रभू ), ( तू ) स्वयं ही मिलाता है और ( फिर तू ही अवियोग भी कराता है ( इन सब संयोग और वियोग से खेलों में ) अपनी बनाई ( आप ही ) देखता है 1: २ ।
10
Uvavāiya sutta: Anuvādaka Umeśacandrajī ʻAṇuʾ
वनिनो-षे-ममममथय-मय-मस-नो-ममस तो उ: आप: (ज्ञा-रोगो) के आने पर, उनके वियोग की स्मृति से युक्त होना और ४ सेवित और प्रीतिकर कदम भोगों की प्राप्ति होने पद, उनके अवियोग को स्मृति से ...