WHAT DOES बलिश MEAN IN HINDI?
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Definition of बलिश in the Hindi dictionary
Bullish noun no. [NO] Flute . Kantia बलिश संज्ञा पुं० [सं०]
बंसी । कँटिया ।
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10 HINDI BOOKS RELATING TO «बलिश»
Discover the use of
बलिश in the following bibliographical selection. Books relating to
बलिश and brief extracts from same to provide context of its use in Hindi literature.
1
Rukmiṇiharaṇa īhāmr̥gaḥ
में व मजते बलिश: के बालक:, अत्पायु: शिशु-हाँ असि की भवन्ति अहम् है९८ यलरामो नाम तवाग्रज:। बशर-- भवन्तम्रें कविमागीपाणिनिपीडनाय व कांवेमागीषिवाहाया प्यारि-- पतियों करिध्ये ...
2
Son Machali Aur Hari Seep - Page 107
... से जुई हुई थी । सूख-कांति और एकता थी । नातेदारी निभाने के बहाने ही यहीं । जाववालों को पुरे कत्ल जाना ही पड़ता था । डिमरी को औगोलिक स्थिति यई विचित्र थी । बलिश उसे विकट काना ...
Om Prakash Kashayap, 2008
3
Aadhunik Bharat - Page 264
वे चाहते थे कि लित्चायही बाधाओं ई: लगों और निषिद्ध सड़यों पर ही न चले, बलिश समी मंदिरों में प्रवेश बरे । 1927 में एस. एना ही पी. रोगन के लिधिव सी. अ, माधवन के गांधीवादी नेतृत्व की ...
4
Mrityu Sa Balvaan Hota Hai Prem - Page 151
उसकी पीठ ब-कुछ शकी लगी जो किसी होशिया छात्र जैसों मुई हुई नहीं बलिश शायद भारी छोडा उठानेवालों जैसों थी । शयन बाप-भी ही लगी गो भी के लक्षण भी दिखे-जबकी उठके बदन का दृबरा हिम ...
Anu.Indu Prakash Kanungo, 2008
5
Koi Baat Nahin: - Page 92
न जाने बल, मंत् ने उसे बार-बार यह बताना चाहा है कि उन दोनों के रिझा में कभी पापा ने यत को जीने के लिए ताकत या सहारा नाहीं दिया, बलिश वे खुद सं, में ही सहारा छोजते को । "हुकरे (ते ...
6
Muktibodh Ki Samikshaai
मष्टिष्णु व औयकीर्द्ध जैल सुधारों ( 1 प, 0-20 ) बर उदेश्य किसी भी प्रकार भारत यई स्वाधीनता को और त्, जाना नहीं था, बलिश नई- परिस्थितियों में उई जिटिश सामान वल एक अंग बनाये ररवना भी ...
7
झूठ नहीं बोलता इतिहास: अल्पज्ञात रोचक इतिहास-प्रसंग
सं, पृ-र इनायत खा" पहाड की नहीं बलिश भरत की थी । हुआ यह था कि एक भरतीय नवाब जो एक तं रहमत ऐ, चाही पत का यच-ए करते हुए हुनिया पर का होत कर रहे है । जब वह अमेरिका में वे तव उनम] मुसकान ज/सई ...
8
Hindi Ka Gadhyaparv: - Page 249
यही नहीं बलिश परिवर्तन' के 'प्राय' और 'मृ/चु' के पतीबत में यम महायुद्ध की (गाया देखना तो और भी स्वकृष्ट है । चेलिशेय ने इस कविता में जीवन-मृत्यु और जि-प्रलय के द्धन्द्रल्पक विन्यास ...
9
मेरे साक्षात्कार सीरीज़ - Page 99
जैनेन्द्र हिन्दी महिय के संकट तो देश के राजनीतिक संकट से ही छोड़कर देखो दो विर नहीं थे बलिश उनका आम था कि यह राजनीतिक संकट भी बज की केकय सभ्यता के कते पैनिक संकट का ही एक अंग ...
10
Adhunik Sahitya Mein Prayogwad - Page 20
नहीं (मण यर बलिश निल को, ये उपमान मैंने हो भी (2 2- और देय-कता----") कविता'' के पपीता अपना पमुख लक्ष्य निजी मान्यताएँ और अनुभूति के मानते है है यह जरूर वैयक्तिकता को प्रवृत्ति है ।