WHAT DOES मृगवारि MEAN IN HINDI?
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Definition of मृगवारि in the Hindi dictionary
Mrigavari pu noun no. [No 0] Mirage water U-Suit Dreams Only coherent anger Snake jelly cake Ra-Basil (word 0). मृगवारि पु संज्ञा पुं० [सं०]
मृगतृष्णा का जल । उ०—सुते सपने
ही सहै संसृत संताप रे । बुड़ो मृगवारि खायो जेवरि के साँप
रे ।—तुलसी (शब्द०) ।
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10 HINDI BOOKS RELATING TO «मृगवारि»
Discover the use of
मृगवारि in the following bibliographical selection. Books relating to
मृगवारि and brief extracts from same to provide context of its use in Hindi literature.
1
Vinaya-pīyūsha: sarva siddhānta samanvita Vinayapatrikākā ...
पूको अछे डूब' : मृगवारि---गर्मामें जब वायुकी तहोंका घनत्व उष्णताके कारण असमान होता है, तब पृ-वीके निकउकी वायु अधिक उष्ण होकर ऊपरको उठना चाहती है । परन्तु ऊपरकी तई उसे मर उठने २ देती ...
Tulasīdāsa, Añjanīnandana Śaraṇa
2
Hindī ke prācīna pratinidhi kavi
इतना ही नहीं 'व्ययों मृगवारि खायो जेबरी को साँप र कहकर जगत् को 'मृगवारि' एवं जिबरी को साँप' की भांति भ्रमात्मक बताया है और 'जागु जागु जीव जड़ जोहै जग-जामिन., देह गेह नेह जानि ...
Dvārikāprasāda Saksenā, 1964
3
Adhyayana aura āsvāda: sāhityika nibandha
... रे 1: ६६ है: इस संसार को उन्होंने मृगवारि और व्या-सर्व और स्वप्न-का-सा बोखा भी माना है-पते मृगवारि, खायो जैबरी को साँप रे'(७ ३ ) वाकयों इन उपमाओं द्वारा उन्होंने संसार के त्याग पर ...
4
Tribes of Assam - Page 111
There came a time when the fair verdant land of Achik Asong was smitten with a grievous drought and famine and Simsang river shrank to a mere trickle at Mrig Wari ; the Ahnang Wari of the Ildek River became only knee-deep; and the plains ...
5
Vinayapatrikā: ālocanā aura bhāshya : Ema.E., sāhitya ...
बूडयों मृग-वारि खायो जेवरी को सोप रे ।: कहैं वेद-बुध तू तो बुझि मन माँहि रे : दोष-दुख सपने के जागे ही मैं आहि रे 1: : तुलसी जागे ते जाय ताप तिर ताय रे है राम नाम सुचि रुचि सहज सुभाय रे ।
Tulasīdāsa, Dan Bahadur Pathak, 1964
6
Vinayapatrikā: eka tulanātmaka adhyayana : ...
अ. वहीं ५३/७ । ८. 'तुलसीदास : जीवनी और विचार धारा' पृष्ट ३९० तथा ३९१ : ९० विनयपत्रिका-१२१/२ 'जो जग मृषा तापत्रय अनुभव होत कहहु केहि लेखे । कहि न जाय मृगवारि सत्य, भ्रम ते दुख होई लेखे 1: १०.
Oṅkāra Prasāda Tripāṭhī, 1983
... साहस का बारूद ही हमारी घबराहट की नमी से ठख्या है है उसमें आग लगे तो असे ? तुलसीदास जी ने कहा हैं--सोवत सपनेहु सहे सकते संताप रे है वृदूयों मृग-वारि खायी जेवरों को साँप रे 11 हमें ...
8
Sūra tathā Tulasī ke vinayapadoṃ kā tulanātmaka anuśīlana
जीव का अपना उपासक रूप होता है : यदि जीव भगवत्-परायण नहीं और उसे यह जगत 'हरिराय' भासे तो वह 'घनवामिनी' और जिवरी को सांप' है । सोवत सपने हूँ की सतत संताप रे : बूइयों मृग वारि, खारी जेवर.
9
Pramukha kaviyoṃ para ālocanātmaka adhyayana: vibhinna ...
... जोहे जग-दामिनी है देह-गेह-नेह जानि जैसे धन दामिनी ।१ सोवत सपने सहे संसृति संताप रच है बुल, मृगवारि खायी जेवरि को सांपरे है: कुछ अन्य आलोचकों ने भी चतुर्वेदी जी से मिलती-जुलती ...
Devi Sharan Rastogi, Devīśarana Rastaugī, 1967
10
Maharshi Mem̐hīm̐-padāvalī: santamata-siddhānta evaṃ ...
मृग-वारि सम सब ही प्रप८च्चन, विषय सब दु:ख रूप हैं है निज सुरत को इनसे हटा, प्रभु में लगाना चाहिये 1. अव्यक्त व्यापक व्याप पर जो, रखते सबके परे : उस अज अनादि अनन्त- प्रभु में, प्रेम करना ...
Mem̐hīm̐ (Maharshi), 1982