WHAT DOES मूलग्रंथ MEAN IN HINDI?
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Definition of मूलग्रंथ in the Hindi dictionary
Basic Noun Synonyms [NO] Original texts whose paraphrase, commentary etc. have been done. मूलग्रंथ संज्ञा पुं० [सं०]
असल ग्रंथ जिसका भापांतर, टीका आदि की गई हो ।
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10 HINDI BOOKS RELATING TO «मूलग्रंथ»
Discover the use of
मूलग्रंथ in the following bibliographical selection. Books relating to
मूलग्रंथ and brief extracts from same to provide context of its use in Hindi literature.
1
Bhāratīya saṃskr̥ti aura Hindī-pradeśa - Volume 1 - Page 691
इस श्लोक के आधार पर मैकडनल ने मूल ग्रंथ जय की शलोक संख्या 8 हजार 800 मानी है । " पर डॉ० सी०वी० वैद्य का कहना था कि “ यह संख्या तो उन श्लोकों की है जो कूट हैं । ” ( उपर्युक्त ) वैद्य की ...
2
Bhaktitattva aura Telugu kā bhakti-sāhitya - Page 8
किन्तु हमारा अनुमान है कि इस आन्दोलन का मूल ग्रंथ भागवत नहीं "प्रबन्धन" है । यह इस कारण कि आप भागवत और प्रबंधन, ये दोनों ग्रंथ एक ही समय में लिखे गये, फिर भी प्रबन्धन, की बहुत सी ...
3
Anuvāda: bhāshāem̐, samasyāem̐ - Page 41
... कोल के हैं : उपनिषदों के विभिन्न सासे-विक भाष्य. में सामान्य पाठक की रुचि नहीं होती : यों दर्शनों के मूल ग्रंथ अनूदित होकर लोकप्रिय बनते हैं : उनकी विभिन्न सांप्रदायिक टीकाएँ ...
Ena. Ī Viśvanātha Ayyara, 1986
4
Sāṅkhya darśana kī aitihāsika paramparā
किसी ग्रबश को प्रक्षिप्त कहा जा सकता है है मूल ग्रंथ के किसी भाग पर केवल एक भाष्य के न होने को प्रक्षेप का कारण मानना तो शास्त्र के साथ सर्वथा उपहास ही करना है' : है इस प्रकार पूर्व ...
मूल ग्रंथ लिखना छोड़कर उत्तरकालीन वैयाकरण टोका-उप-टीका लिखने लगे, जिनका ध्येय मूल ग्रंथ का तात्पर्य प्रकाशन उतना नहीं था, जितना मूल ग्रंथ में न दिए गए विषयों का प्रतिपादन और ...
Sarasvatīprasadacaturvedī, 1973
6
Gujarātī sāhitya kā itihāsa
इसमें एक रस-काव्य अथवा आख्यान-काव्य के सभी लक्षण मूल ग्रंथ तो लंबे-लई मिश्र वाकयों के कारण इतना विलष्ट हैं, साथ ही मूल ग्रंथ के सौंदर्य को अक्षुण्य रखने में कवि बहुत सफल हुआ है ...
Jayantakr̥ṣṇa Harikr̥ṣṇa Dave, 1963
7
Śrī Cilakamarti Lakshmī Narasiṃham - Page 34
नामकरण में उन्होंने मूल ग्रंथ के नाम के भिन्न नाम रखा । इस ग्रंथ के साथ एक दुन्द्रमरा प्यारा है । पिठापुरम् राजा के अंतरंग सचिव एव प्रसिद्ध साहित्यकार मोक्यापाटि सुब्बारायुडु ...
Vi. Vi. Yal Narasiṃhārāvu, Sahitya Akademi, 2006
8
Prācīna Bhāratīya yuddha-vyavasthā: 200 Ī. Pū.-300 Ī - Page 11
दुर्भाग्यवश उनके द्वारा लिखित मूल ग्रंथ आज उपलब्ध नहीं हैं, परंतु परवर्ती लेखकों ने उनका उपयोग किया और अपने ग्रंथों में उनके उद्धरण भी प्रस्तुत किये । इन लेखकों में सर्वप्रथम ...
9
Bhāratīya bhāshāoṃ ke sāhitya kā saṅkshipta itihāsa - Page 254
... चक्रधर ये पाँच कृष्ण वे मानते हैं । चक्रधर के वचनों का संग्रह 'मूलपाठ' इस पंथ का मूल ग्रंथ है : जीवेश्वर भेद, भक्तियोग, संन्यास और अहिंसा इनके मूल आधार हैं । इस पंथ पर जैन धर्म का भी ...
Gopal Sharma, Tārā Tikkū, Jagdish Chaturvedi, 1974
10
Ācārya Kundakunda: dravyavicāra - Page 102
क्रम मूल ग्रंथ गाथा-क्रम क्रम मूल ग्रन्थ गाथा-क्रम 3 1 पंचास्तिकाय 32 पंचास्तिकाय 3 3 पंचास्तिकाय 34 पंचास्तिकाय 3 5 पंचास्तिकाय 36 पंचास्तिकाय 37 पंचास्तिकाय 38 ...
Kamal Chand Sogani, Kundakunda, 1989
4 NEWS ITEMS WHICH INCLUDE THE TERM «मूलग्रंथ»
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मूलग्रंथ is used in the context of the following news items.
राष्ट्र भाषा से ही देश बनता है विकसित
प्राचीन अद्भुत वैदिक साहित्य संस्कृत में है, विश्व के प्राचीनतम दर्शन, कला, साहित्य, विज्ञान आदि सभी के मूलग्रंथ संस्कृत में है। लेकिन हम संस्कृत और उससे उत्पन्न हुई भारतीय भाषाओं को महत्व नहीं दे सके जब तक हमने अपनी राष्ट्र भाषा को ... «देशबन्धु, Aug 15»
महाभारत का समय
इस बीच महाकाव्य का मूलग्रंथ पूरी तरह से परिवíतत हो गया था और इसलिए महाकाव्य में वíणत घटनाओं के आधार पर की गयी गणना पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता है. जैसाकि हम सभी जानते हैं, महाकाव्य के मूलगंथ को समय-समय पर विस्तारित किया गया है. «प्रभात खबर, Mar 15»
महाशिवरात्रि : 20 साल बाद तीन दिन में तीन शुभ संयोग
शिव महापुराण की रूद्र संहिता के तीसरे खंड के मूलग्रंथ अनुसार जब पर्वकाल में रात्रि के समय शुभ संयोग हो तो, वह मंगलकारी होता है। 18 फरवरी-बुधावती अमावस्या. शिवरात्रि के अगले दिन बुधावती अमावस्या आ रही है। बुधवार के दिन अमावस्या हो तो ... «Nai Dunia, Feb 15»
मंगल योग में मनेगी महाशिवरात्रि
मंदिर के गर्भगृह में पुजारी महारूद्राभिषेक करेंगे। पश्चात भगवान को फूल तथा फलों से बना सेहरा सजाया जाएगा। सप्तधान स्वरूप में राजाधिराज के दर्शन होंगे। शिव महापुराण की रूद्र संहिता के तीसरे खंड के मूलग्रंथ अनुसार जब पर्वकाल में रात्रि ... «Nai Dunia, Jan 15»