WHAT DOES पदमैत्री MEAN IN HINDI?
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Definition of पदमैत्री in the Hindi dictionary
Pedestrian Noun Female 0 [NO] The same word or letter in a poem To come again and again in this manner The miracle is coming. Alliteration Playmate Characteristic like, Mallikan Manjal Mallind Matvare got slow slow mortuary Mansa is .- (word 0). पदमैत्री संज्ञा स्त्री० [सं०]
किसी कविता में एक ही शब्द या अक्षर
का इस प्रकार बार बार आना जिसमें उसमें एक प्रकार का
चमत्कार आ जाय । अनुप्रास । वणांमैत्री । वर्णसाम्य । जैसे,
मल्लिकान मंजुल मलिंद मतवारे मिले मंद मंद मारुत मुहीम
मनसा की है ।—(शब्द०) ।
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10 HINDI BOOKS RELATING TO «पदमैत्री»
Discover the use of
पदमैत्री in the following bibliographical selection. Books relating to
पदमैत्री and brief extracts from same to provide context of its use in Hindi literature.
1
Hindī-rītikavitā aura samakālīna Urdū-kāvya: san 1643 se ...
रमना की पदमैत्री 'जमुना' में न होकर 'जमना' में है, अता पाठ 'जमना' होना चाहिए है 'जमना' में जम (यम) की स्पष्ट ध्वनि हैं, अत: 'जमना' मृत्यु की प्रतीक है । यमुना को यम की बहिन होने से मृत्यु ...
2
Mahākavi Nirālā aura unakī Aparā: 'Aparā' kāvya-saṅkalana ...
... वे अब भल हो उठे और उन्होंने अनेक प्रकार से प्राणों की आन्दोलित कर दिया : विशेष-ना १) अभिव्यक्ति की सरलता ध्यातव्य है : (२) अनुप्रास अलंकार : (३) पदमैत्री : नयन के साथ "य-------...---.------".---.
3
Bhāshābhāgavata, Daśama Skandha
भाषा में सर्वत्र एक प्रवाह विद्यमान है और कहीं-कहीं तो बडी अनूठी उक्तियां हैं :भाषा-प्रवाह एवं पदमैत्री ; शारद नाद विशारद नारद एक न गायों । ० ० ० कसक मसकमाधुरी रद-रन की मन भवन ।
Balavantarāva Bhaiyāsāhaba Śinde, Rādhācaraṇa Gosvāmī, Triloki Nath Chaturvedi, 1989
4
Mahākośala ke sāhityakāra: Mahākośala Hindī sāhitya kā ...
... इनकी भाषा बज और २१देलखच्छी का मिश्रण है, जिसमें आनुप्रासिक छटा, सुप्रबन्ध-योजना, पदमैत्री, प्रसाद और माधुर्य 'वय/त छंटा देखने को मिलती है है 'अष्टयाम' में कवि ने अपने उपास्य की ...
5
Kāvyāṅga-prakriyā: - Page 325
ऐसा पदमैत्री और सन्धियों के कारण होता है । अरुत्युत्तरव दिखी देवतात्मा७ और 'जीवन निशीथ के अन्धकार3 जैसे पदबंध इसके उदाहरण हैं । रचना का अन्त तक अभेद अर्थात् निर्वाह समता नामक ...
Śaṅkara Deva Avatare, 1977
6
Sūra aura Annamācārya meṃ prema aura mādhurya tattva - Page 330
कहीं-कहीं एक ही लीला के विविध रूपों में वर्णन मिलता है, जिससे भय भी और अधिक स्पष्ट और मरमि होते हैं । सूर के रूप वर्णन के गीत पदमैत्री और ध्वनिसाम्य के रोचक उदाहरण प्रस्तुत करते ...
7
Hindī kāvya ke āloka-stambha:
इसके लिए वर्ण-मैत्री, शब्द-मैत्री, पदमैत्री, कोमला तय, उपनागरिका वृत्ति इन गुणों की आवश्यकता होती है । महादेवी जी के शब्द-प्रयोग में 'ट' वर्ग के वणों तथा कठोर वणों का बहुधा अभाव ...
8
Meghadūta evaṃ paravarttī dūta-kāvya: Saṃskr̥ta-sāhitya ke ...
रानुकूलता और शब्दर्यवी, पदमैत्री आदि से परस्पर मैत्रीभाव का साधक हो [ वह 'वाम' भी हो अर्थात सौन्दर्य-मार से सरस हो । 'नस' रूप गुण-ध्वनि से वह परिपूर्ण हो । वासनापाक की समता में वह ...
Narendra Deva, Rudradeva Tripāṭhī, 1990
9
Miśrabandhu vinoda - Volumes 1-2
... चंपकलता-सी चपला-सी चित चीरती ।।४१: उपर्युक्त उदाहरणों से यह भी विदित है कि शेखरजी पदमैत्री का अछा व्यवहार कर सकते थे है भारी जाग, प्राबल्य और गौरव इनकी कविता के प्रधान गुण है ।
Gaṇeśavihārī Miśra, Shyam Behari Misra, Sukhdeo Behari Misra, 1972
10
Vidyāpatī kī kāvya-sādhanā:
भाषा की ध्वन्यात्मकता, पदमैत्री, अनुप्रासों की रमणीयता अनेक स्थलों पर देखते ही बनती हैं । लगता है, जैसे उनकी शब्द-योजना स्वयं अपने में ही गीतितत्व को समेट कर चल रह, हो : अत:, इस ...