WHAT DOES प्रमुद MEAN IN HINDI?
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Definition of प्रमुद in the Hindi dictionary
Pramad v. Pradesh merchant Hearty Blissful प्रमुद वि० [सं० प्रमुद]
हृष्ट । आनंदित ।
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10 HINDI BOOKS RELATING TO «प्रमुद»
Discover the use of
प्रमुद in the following bibliographical selection. Books relating to
प्रमुद and brief extracts from same to provide context of its use in Hindi literature.
1
Br̥hadāraṇyakopaniṣadbhāṣyam
पुन: ( आअंदा:२मुद:म्प्रमुदा।नस्मवन्तियअवआनन्या.द"-प्रमुद:यजते ) सामान सुख पुग्रादि संबन्धी निमित्त हर्ष अयन हर्ष थे सब स्था में नहीं होते है परन्तु अस, की और प्रबोदों को बना लेता ...
अत्र श्रुति: है सप्तमाष्टके है यत्रानन्दाश्य मोदाश्च मृद: प्रमुद आसते । कामस्य यत्रामा: कामास्तत्र माममृतं कृधीन्द्रायेन्दो बरम । भा९यन् है कामस्य वासनामय मनस: कामा: यवासा: ...
3
Abhinava saṃskāra candrikā - Volume 2
ओं मवानन्दाएच मोदाशच मुद: प्रमुद आसते है कामबवाप्ता:कामास्तत्र माममृतं कृधीन्द्रायेण्डीपरिधश ऋ० मति थी : सू०११३ । मं०११ 1. अर्थ:---, ( इन्दो ) सर्वानन्दयुक्त जगदीश्वर ! ( यत्र ) जिस ...
Bhīmasena Śarmā, Haridatta Śāstrī, Īśvarīprasāda Prema, 1965
4
Bhāratīya saundaryaśāstra ki bhūmikā
यद्यपि प्रारंभिक वैदिक साहित्य में सुन्दर, सौंदर्य आदि शब्द. का प्रयोग भी नहीं हुआ है ; परन्तु वहाँ आनन्द, नन्द, मोद, आमोद, मुद, प्रमुद, प्रिय आदि शब्दों" द्वारा जिस अनुभूति की ओर ...
5
Guru Gobindasiṃha kā vīrakāvya
दोहरा :प्रमुद करन सभ भय हरन, नाम चहका जनास : रची चरित्र बचित्र तुअ करों सुभ प्रक-स है ५ । सराहा त---आइस: अब जो होइ ग्रन्थ तउ मैं रथों । रतन प्रमुद कर बचन चीन ताम गरी । भाखा सुभ सभ करहीं ...
Gobind Singh (Guru), Jayabhagavāna Goyala, 1966
6
Cintana aura caṅkramaṇa
प्रयोजन को पूर्ण करने में सर्वथा असमर्थ हूँ है अन:, (ते तए तन्न: न संपति-लियाम) इसीलिए मैं तेरे शरीर का सम्पर्क नहीं करता हैं" है (मव अ-यिन प्रमुद: कल-) अ:, तू अन्य पुरुष के साथ अपना ...
7
Bhakti kā vikāsa: Vaidika bhakti evaṃ Bhāgavata bhakti ...
इन्द्र-ब इन्दोपरिधव 1: ९ 1: यत्र कामा निकाल यत्र बनाय विल : सरधा च यत्र तुहिन तत्र मामृवं कृधि 1: बै, हैं, 1: १० है: यवानन्याबच मोदाबच मुद: प्रमुद आसते 1 कामस्य यल: कामा: तत्र मई कृषि 1, ...
अथासिमर्वेऋकूशातीयां 'भूति सम्वादयत्राह-यवानन्दा इति है यत्र यरिमर परमानन्द सब आनन्दा: मनु१९यानन्दा:, तथा पितृगां प्रमुद:, आजानदेवानां एवमुत्तरोत्तरं सवे-पि आसते वर्तनी ।
Śaṅkarācārya, Ānandagiri, 1987
9
Upanishad Sangrah (188 Upanishdon Ka Sangrah)
... स्था न रथबोगा न प-स्थानो भव-मयथ स्थाअथगोगान्यथ: अते न तवानन्दा मुर: प्रबल भव-पप-राब मुद: प्रमुद: सृजते न तब वेशाम्ता: अरि-य: खवनवो भव-मयथ वेशान्तान् पुष्करिणी: खवन्ती: अते स हि कल ।
Pandit Jagdish Shastri, 1998
10
Miśrabandhu vinoda - Volumes 1-2
नेम धरि देम सों प्रमुद होय दीन., प्रेम कोकनद बीच कब औ कलन हैं ; चरन तिहारे जदुबंस राजहंस कब है मेरे मन-मानस मैं मंद-ब डोलि हैं ।।३।। अन्योक्तिकलपम आकार में इनके प्रथम ग्रंथ से कुछ छोटा ...
Gaṇeśavihārī Miśra, Shyam Behari Misra, Sukhdeo Behari Misra, 1972