10 HINDI BOOKS RELATING TO «रक्तोत्पल»
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रक्तोत्पल in the following bibliographical selection. Books relating to
रक्तोत्पल and brief extracts from same to provide context of its use in Hindi literature.
1
Pantajī aura Kālākān̐kara
... आर-पार है अब हुआ मान्ध्यास्वणीभ लोन सब वर्ण-वस्तु से विश्व हीन है गंगा के चल-जल में निर्मला कुचला किरायों का रक्तोत्पल है वंद चुका अपने मती दल है लहरों पर स्वर्ण-रेख सुन्दर पड.
Sumitrānandana Panta, Suresh Singh, 1982
2
Dhanapāla kr̥ta Tilaka-mañjarī: eka sāṃskr̥tika adhyayana
रा],पुरीय है रक्तोत्पल ]पु,तिरामी है कोकनदस्ऊँटी है कुवलय+!रारा, :टेरा,!पुरा,टाप,तिधि,झपु है इन्दीवर-टेरा,::,:-!] | नीलोत्पल-गा/शोते | (पु) कल्पदक्ष-स्पंचदेवकृनों में से एक | मी!,मीपु,दृर्वर ...
3
Rājasthānī veli sāhitya
पैरों में रक्तोत्पल को जीत लिया है जो लक्ष्मी का निवास कहा जाता है3 । उसके सौन्दर्य का क्या वर्णन किया जाय ? कवि की बुद्धि कूड़ी (अपटु) और बानिनी (व्यवसायिनी) है* । काला पक्ष ...
4
Ādhunika sāhitya: vividha paridr̥śya
ै क्रमश) दिरवाई के कानों को सुशोभित करने वाले रक्तोत्पल के समान मनोहर सूर्यमण्डल अस्त हो गया आकाश-रूप सरोवर में सन्ध्या-रूपी पहिमानी प्रकाशित हो उठी, कृध्यागुरु के पंक ...
Sundaralāla Kathūriyā, 1973
5
Sumitrānandana Panta, vyaktitva aura kr̥titva
... हुआ सान्तय स्वणमिलीन सब वर्ण-वस्तु से दिश्व हीन | गंगा के चल-जल में निर्मला कुम्हारा किरणन का रक्तोत्पल है मरद चुका अपने मुदुदल | लहरों पर स्वर्ण-रेख सुन्दर पड़ गई नीक उयों अधरों ...
Ramji Pandey, Sumitra Nandan Pant, 1982
6
Rīti-svacchanda kāvyadhārā
... लिए परकृत, रक्तोत्पल के लिए रतोपल, रश्मियों के लिए रसमैं, चरण के लिए चर्ण, स्फुलिंग के लिए फुनिंग, तभी के लिए तमई, आयु के लिये आऊ, कमलनि के लिए कौंलनि, नृत्य के लिए नित्र्त आदि ...
Kr̥shṇacandra Varmā, 1967
रक्त - ५ १४ * मुक्तास्फोट १० २३ : मेधा ४५ २ : *्त' : १० २२ * मुक्ति ५, ६ * मेरु १ ४९ रक्तसन्ध्यक: १० ३६ . मुखवासन : ५ ११ . मैत्रावरुणि : ३ २० . रक्तसरोरुह : १० ४१. मोक्ष : . ५ म्लिष्ट : ६ य मुद ४ २४ : g, रक्तोत्पल १० ...
8
Saundaryaśāstra, vijñāna aura kaviprasiddhiyām̐
... स्वर्गगा की धारा | (वहीं पुष्ट है जब हुआ सान्ध्य स्वणिभ औन सब वच वस्तु से विश्व दीन गंगा के चल जल मे निर्मल कुम्हारा किरायों कई रक्तोत्पल है म्हूंद चुका अपने मुदु दल मलिन उर छूकर ...
9
Pradyumna-kāvya-vimarśa
... है वात्सल्य रस (वियोग वात्सल्य) (पद्य/न-हरण प्रसभाच्छा आर रूविमणी आलंबन विभाव-पद्य/न उदूदीपन विभाव-शिशु प्रद्वासंम्न का कुवस्ज्यदन्राक्षा अनि/नवार रक्तोत्पल मुथालवए करगाल, ...
10
Chāyāvāda kī prāsaṅgikatā
... कुम्हारा किरायों का रक्तोत्पल है था चुका अपने मुदु दल लहरों पर स्वर्ण रेख सुन्दर पड़ गई नीला ज्यो अधरों पर अरुणाई प्रखर शिशिर से डर क्या यहीं कवि अधिक मुक्त-मुखर औरसंवेदनशील ...
Ramesh Chandra Shah, 1973