WHAT DOES ससिहर MEAN IN HINDI?
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Definition of ससिहर in the Hindi dictionary
Adjoining pu noun n [nos. Shashdhar] Moon- U-Satir The deceased Mohiu Thi Hsi Melhi Veena, Dhola 0 Du 570. Sasir Pu 2 Nanny Female 0 [Number Shashi + Dhar] Shishir season U- Some women are not married, but they are very close to their family. - Page 0, 61.64 ससिहर पु १ संज्ञा पुं० [सं० शशधर]
चंद्रमा ।—उ०—ससिहर
मृगरस्थ मोहियउ तिण हसि मेल्ही वीण, ढोला० दू० ५७० ।
ससिहर पु २ संज्ञा स्त्री० [सं० शशि + धर]
शिशिर ऋतु । उ०—
कहि नारि पीय बिनु कामिनी रिति ससिहर किम जीजइय ।—पृ० रा०, ६१ ।६४ ।
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10 HINDI BOOKS RELATING TO «ससिहर»
Discover the use of
ससिहर in the following bibliographical selection. Books relating to
ससिहर and brief extracts from same to provide context of its use in Hindi literature.
1
Prakrit Text Society Series - Issue 2
होसे ससिहर हर दूरियों विधुर हर अतुल अभअवर ।।१ ( १।। ज [ सका ] १ ११. उदाहरण :- कि जिनके हाथ में सर्ष का केकय है, शरीर में पत्नी ( पुष्ट की ) सुशोभित है, नेत्र में अग्नि है, गले में जहर है, सिर पर ...
Prākr̥ta Grantha Pariṣad, 1959
2
Mañjhana Kr̥ta Madhumālatī kā kāvya-saundarya
गुन द्वार क्-भि, तकर भूय-चन्द्र के प्रतीको कर प्रयोग दियेहैं है दृ-गुर के है यह सूरूज वह ससिहर यह ससिहर वह सूर है - हाल दुई मेम औति भी उरपेजै चिभूवने बाजै तु-र ||उ , |रकेय| केइ/र उदाहरर्ण मे ...
3
Kabīra-granthāvalī kī bhāṣā
... बिहारर पंजाबी, बंगला के रूप क्ये में प्राप्त होते हैं है इसी तरह जेन ससिहर आदि अपन के पुराने रूपो तथा अरबी-फारसी के अनेक शके-यों का कारण बताते हुए उन्होंने कबीर की भाषा-व्याकरण ...
4
Madhumālatī: Mañjhana kr̥ta
यह रे सूर वह ससिहर, यह ससिहर वह सूर । इन्ह दुहुँ पेम प्रीति जो उपजै, त्रिभुअन बाज दूर ।।६९।: के कहेगी कि यह पेम पियारा, हम यहि नगर चरों गति आई जो लगि वेद सोवे येहि ठाई, वन गौनी लखराउँ सवाई, ...
Mañjhana, Shiv Gopal Misra, 1965
5
Ḍôkṭara Pītāmbaradatta Barathvāla ke śreshṭha nibandha
उदाहरण के लिए : आओ माई धरि धरि जाओ गोरख बाल भरि भरि खाओ : भरें न पारा बाजै नाद, ससिहर सूर न वाद विवाद ।: पवन गोटिक रसम अकता मसल असार गगन कबिलास है पल नी डीवी सुनि चढाई कब गोरखनाथ ...
Pitāmbaradatta Baṛathvāla, Govinda Cātaka, 1978
6
Bihārī Satasaī kā śāstrīya bhāshya
विशेष-त्: ) ढीठ शब्द से कवि के मन की अत्यधिक रसडिता व्यंजित की गई है : ( २) ससिहर गयो न सूर- सूर में श्लेष है । सूर के बीर और सूर्य दो अर्थ है । ससिहर चन्द्रमत को कहते हैं है नायक वना मन ...
Govinda Triguṇāyata, 1977
7
Prākrita-Paiṅgalam: with the commentaries of ...
ु कर फणिबइ बलअ तरुणिबर तणुमह बिलसइ' ण्श्रण अणल' गल गरल बिमल ससहर' सिर णिबसइ। सुरसरि सिरमह रहइ' सअलजण' दुरित दमण' कर, हसि ससिहर- हरउ दुरित' बितरह अतुल'' अभअबर' ॥ ११११ ॥ सक'१ । (B & C).
8
Sundara padavali : Santa kavi Sandaradasa ke samagra padom ...
दिवस न रेंनि सूर नहिं ससिहर आदि अंत भ्रम मांना । जन्म मरन का सोच न कोई पूरण ब्रहा पिकांना 113।। जागि न सोवै षाइ न भूषा मरै न जीवै जाना 1 सुन्दरदास कहै गुरु दादू देप्या अति हैरांना ...
9
Bihārī: kavi aura kāvya
चगोरवा रहम तीठ वाम गहे ससिहर गयो न सूर : सूरते न मन अवान चुभि भी चूरन कोप चूर : ।८९"र ससिहर-च(फा० शशदर) भयभीत, हैरान । अवान-व्य.) ऐश के मर के भाग । चूरन-च--"" चूर्ण) कड़े । नायक सरम से कहता है कि ...
Vihārī Lāla (Kavi.), Harendra Pratāpa Sinahā, Jagadīśa Prasāda Śrīvāstava, 1963
10
Madhyaugeen Premvkhyan
इहै रूप ससिहर और सूरा । इहै रूप जग पूरि अपूरा ।। "मालती, पृष्ट ३८ ३. उ अत सूर जस देखिल चल छापे तेहि धुप । ऐसे सबे जय छपि पदमावती के रूप ।। पद., इदि ई५ ४. सहस', करा रूप मन भूला । जई जई दिष्टि कंवल ...
Dr Shyam Manohar Pandey, 2007