WHAT DOES सेवितव्य MEAN IN HINDI?
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Definition of सेवितव्य in the Hindi dictionary
Service statement v 1. Serviceable Worthy of worship Serveable Durable 2. Worthy of shelter Shelter 3. Chest worthy 4. Worthy of use or behavior सेवितव्य वि० [सं०]
१. सेवा के योग्य । उपासना के योग्य ।
सेवनीय । उपत्सनीय । २. आश्रय के योग्य । आश्रयणीय ।
३. सीने के योग्य । ४. प्रयोग या व्यवहार के योग्य ।
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10 HINDI BOOKS RELATING TO «सेवितव्य»
Discover the use of
सेवितव्य in the following bibliographical selection. Books relating to
सेवितव्य and brief extracts from same to provide context of its use in Hindi literature.
1
Vyākaranacandrodava - Volume 2
यह बात नियत, कृदन्त रूपों में समान है-----. का परिदेवना । ६. फिर प्राय: निपूर्वक प्रयुक्त होता है । इसके आदिभूत था को सिर (दिवा०) सेवितव्य भाप सेर (म्वा०) सेवितव्य मुर दर (ध्या०) 'सू' नहीं ...
2
Mahābhārata-Udyogaparva-antargatā Vidura-nītiḥ: ...
... छोडा=द्रनहीं रोका अत: तुम बुद्धिमान नहीं हो, यह भी ध्वनित किया है : न तर बलं यत्-दूना विरुध्यते यच-यों यमयसा सेवितव्य: । प्रब्दोंसेनी कूरसमाहिता 'बीर, मृदूर्णढा गा-बत पुत्औवात ।
Yudhiṣṭhira Mīmāṃsaka, 1971
3
Viduranītiḥ: "Saralārthabodhinī" Hindīṭīkopetā
न ताल यन्मृदुना विरुध्यते चले यर्मस्तरखा सेवित-व्य: । प्रध्व.धिनी सूर-हिता औसंदुबीया गच्छति पुअगौजान्द्रमि१।: मवय-पय बलं न, यर मृदुना ( सह ) विलयते, धर्म: यम:, (स:) तरसा सेवित-य:, आ क.
Vedavyāsa, Anantarāma Śāstrī Vetāl, 1958
4
The Mahāvagga - Volume 16 - Page 126
"कतारों च, भिक्खवे, पुमालों सेवित-व्य) भजितउयों पथिव्यासितठबी ? ब, भिमवे, एक-ज्यों पुग्गलों सीलवा होति कलमधम्म. । एव-रूपो, भिक्खवे, पुग्गली सेवित-व्य) भजितंबों पयिरुपासि-त-को ...
Jagadīśa Kāśyapa (Bhikkhu.), 1956
5
Pracheen Bharat Ka Samajik Aur Arthik Itihas Hindu Samajik ...
दशलक्षणको धर्म: सेवितव्य: प्रबलता ।। धृति: क्षमा दमोपुसोयं शीघमिरियनिग्रा: । धीर्विधा सत्यमक्रोधो दशक धर्मलक्षणम् ।। मनु॰ 6.9.-2 6. सत्यमस्तेयमक्रोधो बी: शौचं धीवृंतिर्दम ।
6
Menu Sanhita: the Institutes of Menu - Volume 2
... श्राह्मनेा ध्यानं ई प्८२ परित्रजयापकलं ई -५ वेद संन्यासिककाह ६ प्८६ चत्वा"र"श्राश्श्रमा: ६ य८७ खर्वाश्रमफल ई प्८८ छूgहस्यख भ्रश्रछात्वं ६ प्-९दशविधधर्च सेवितव्य: ६ ९१ दशविधधकानाह ...
Manu, Kullūkabhaṭṭa, 1830
अरु के दशलक्षपाको औ: सेवितव्य: प्रबलता ।। ९१ ।। पचतवंहेचायर्थिभिराश्रणिभेधतामिरपि हिजातिभिर्वदयमाणी दशविधस्वरूपी धरी: पनाह सततमनुशेय: ही ९१ ही तमेव स्वरूप सील्याविभिथ दर्शय.
J. L. Shastri, Sures Chandra Banerji, 1990
8
Mrichchhakatika Of Sudraka
Dr. Ramashankar Tripathi. यल्लेन सेवित-व्य: पुरुषा कुलशीलवान् दरिद्री७पि : शोभा. हि. पणाबीजा. सदृशजासमाश्रय: काम. 1,. लेले. 1: संदार्थ:-हे खलचरिती की है दुष्टचरित वाले 1 निकृष्ट ।=अधम ।
Dr. Ramashankar Tripathi, 2006
9
Mānasa Catur̲tha Śatābdī Samāroha, Śrī Prayāganārāyaṇa ...
महाप्रभु चैतन्यदेव ने कहा था कि स्वयं अमानी रहकर और दूसरों को मान देकर श्रीभगवान की सेवा करनी चाहिए-अकाय मारे सेवितव्य: सदा हरि: । अपनी ही कमजोरियों का बहाना बनाकर गोस्वामी ...
Lalita Mohana Avasthī, 1973
10
Manusmṛti: Bhāṣyakāra Tulasīrāma Svāmī. 3. Saṃśodhita ...
दशलक्षणको "धर्म: सेवित-व्य प्रयत्न. ।।९१ता९ (ति: क्षमा यमोपुसोयशोचमिन्दिद्रयनियह: है धीर्तिद्या सत्य-य दशम धर्म लक्षणम् ।1९२।। चारों आश्रमों द्विजों को दश लक्षण वाले धर्म का ...
Manu ((Lawgiver).), Tulasīrāma Svāmī, 1969