WHAT DOES उरज MEAN IN HINDI?
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Definition of उरज in the Hindi dictionary
Urj pu pn [no bro] Kuch breast . U-flooding ur Urja Bharpan Taranai Development Loaded RUSH UASAT.-Bihari (word 0). उरज पु संज्ञा पुं० [सं० उरोज]
कुच । स्तन । उ०—बाढ़त तो उर
उरज भर भर तरुनई विकास । बोझनि सौतिनि के लिए आवतु
रूँध उसास ।—बिहारी (शब्द०) ।
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10 HINDI BOOKS RELATING TO «उरज»
Discover the use of
उरज in the following bibliographical selection. Books relating to
उरज and brief extracts from same to provide context of its use in Hindi literature.
1
Bhaktikālīna kāvya meṃ nāyikā-bheda
ना/यका की रिरंसा और लल्ला में संघर्ष का सुन्दर चित्रण हुआ है है यथा-स्-बब वह छबि अंग निहारत स्याम | कबहँक चुके देत उरज धीर अति सकुचति तनु बाम दुई सनमुख नेन न जोरति इन निलज भए प्रिय ...
2
Bhaktikālīna kāvya meṃ citrita nārī-jīvana
त थे नेन जल नदी पर्वत उरज येह मनु सुभग बेनी भई अहिति कारी ।२ जो को कहि सके उरोजनि की छवि, कंचन मेरु लजान ।१४ उन्होंने कुची को शिव बतलाया है--देखि सखी उरोज कचिन, की धरे बनाई ।१ अ नील ...
3
Hindi Sahitya Ka Itihas
आई होश उरज उरज दृसिं, असे उर आते उसे, बिन गुन माल गो ज छोले छाए हो: लेन कवि यह हैं राते, अते लि, देखे सुने सूख के मर मममए होश जालक सों स्थान भाल, यललन पीझानीक, प्यारे यजचंद सुणि एज ...
Acharya Ram Chandra Shukla, 2009
वादन जो उर उरज भर भर तब नई विकास । गोझनि ज/जिनि के दिये आवत पुल उसास ।। २३ ।। टोका २३---सखो का वचन सरब: से के मायका से । बढ़ती है तेरी छाती कुच के बोझ से, और भर जवानी के दिपलने ( के चमकने ) ...
Lallu Lal, Sudhākara Pāṇḍeya, Sir George Abraham Grierson, 1977
5
Vidyāpati: ālocanā aura saṅgraha
ālocanā aura saṅgraha Anand Prakash Dikshit, Vidyāpati Ṭhākura. बचन क चातुरी, लहु-लहु हास । मुकुर लेई अब करई सिगार । सखि पूछाह कइसे सुरत-विहार ।ना निरंजन उरज हेरह कत बेरि है हसन से अपन पयोधर हेरि 1: ...
Anand Prakash Dikshit, Vidyāpati Ṭhākura, 1969
6
Rītīkālīna kāvya meṃ lakshaṇā kā prayoga:
सारोपा गौणी लक्षणा: च-स 'भाल अधर रद उरज छवि बीज फूल कल भी । वैस संशय मैं दाडिमों लई विचारों एट ।।"१ अधर, रद, उरज, बीज फूल, फल लाक्षणिक पद है । क्रमश: अधर, रद तथा उरज उपमेय हैं और फूल, बीज, ...
7
Hindī Vaishṇava bhaktikāvya: kāvyādarśa tathā kāvya ...
उरज जुगल पर सहज वाम छवि, उपमा कहि सब कवि पचि हरि । रूप परन गुन जस, रस रचि सुख की राल दुखारे । भक्त कवि प्यास जी, पदावली प० सं० ३५३. की की सब अंग कोमल उरज कठोर : दि, प० सं० ३५४० की की सप अ-गनि ...
Yogendra Pratāpa Siṃha, 1969
8
Kr̥ṣṇa-kāvya meṁ saundarya-bodha evaṃ rasānubhūti, eka ...
श्रीफल, कुंभ, संधु सम माने, सरस कविन तेउ नहिं परमाने ।।३ (ई) वाम कपोल विज कुटिल लय उरज रही अरुझाइ । स्याम भुजंगिनि मच सूवा-घट, पीक हू न अल ।१४ (व्यासजी) इन कलशों को कवियों ने ...
9
Bhakta-kavi Vyāys jī: Madhya yuga ke Kr̥shṇa-bhakta kavi ...
दे, उरज वर्धन----. राग सारंग उरजऊँगलपर सहजस्थामचडिन्उपमा कहि सब कहि पधिहारे । रूप म वरन अह गुन जस - रस रानो, सुख की सांसे दुखारे ।। कर-कसली मकर-द पीक अलि, चाहिय न सकत सुखारे । मानी भूत ...
Vyāsa, Vāsudeva Gosvāmī, Prabhudayāla Mītala, 1952
10
Vidyāpatika śr̥ṅgārika padaka kāvyaśāstrīya adhyayana - Page 7
निरजन उरज हेरए कत बर है बिहुंसए अपन पयोधर हेरि 111 एवं कबहुँ बाँधए कच कबहुँ बिमार 1 कबहुँ [वापर अंग कबहुँ उधार 1: बीर नयान अधिर किम भेल । उरज उदय-थल जालिम देल ।। चपल-चरन, चित चंचल भान है ...