WHAT DOES अव्रण MEAN IN MARATHI?
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Definition of अव्रण in the Marathi dictionary
Anaerobic 1 Free of grief, injury, disease, disease etc. (ie, Animal, fruit.) 2 innocent; There is no inferiority; Breach or crack, Not ripped (kalash, pot, khapar etc). [No.] अव्रण—वि. १ दुःख, जखम, क्षत, रोग वगैरेंतून मुक्त (इसम,
जनावर, फळ.) २ निर्दोष; उणेपणा नाहीं असें; भंग किंवा तडा,
चीर नसलेला (कलश, पात्र, खापर वगैरे). [सं.]
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10 MARATHI BOOKS RELATING TO «अव्रण»
Discover the use of
अव्रण in the following bibliographical selection. Books relating to
अव्रण and brief extracts from same to provide context of its use in Marathi literature.
1
Āyurvedīya mahākośa, arthāt āyurvedīya śabdakośa: ...
ताम्र शेख इस्याबीले अंजन शुक्रनाशक अहि वेहेडघाज्या बीतील मजा मधात उगालून डोक्यात अंजन घालावे. अव्रण शुक रोगातरक्तत्नाव, लेप, औषध शिपडणे, नाकात औषध, धूम्रपान, औषधी थेंब, ...
Veṇīmādhavaśāstrī Jośī, Nārāyaṇa Hari Jośī, 1968
2
Roganāmāvalīkosha: roganidarśikā ; tathā, Vaidyakīya ...
अव्रण विश्लेष-क्षतबिरहित संधिविश्लेष (श्रीकाठदत्त--मधुकोथयारूया) । ( अं ० ) व्रलोउड लिस्वीकेशन ( 01०१०८1 (11३1००६1३1०11 ) । अव्रण शुबल्लेत्रकृख्याभागगत रोग ( शुक ), ओंख की हलकी सफेदी ...
3
Bhagna-cikitsā: bhagnopacāra ke siddhānta evaṃ pratyaṅga ...
... का सीवन कर्म कर देते हैं, इस प्रकार उसका रूपान्तरण अव्रण भग्न के रूप में हो जाता है॥ यदि परिस्थितियाँ अनुकूल हों तो समीपस्थ स्थान की त्वचा का भी सीवन क्षत स्थान पर कर सकते हैं।
Prabhākara Janārdana Deśapāṇḍe, 1976
4
Śalya-vijñāna: śālya rugṇa-roga parīkshā
रक्त आघातज प्रान्त में ही संहिता होने से दाहपाक इत्यादि लक्षण तीर होते है 1इस प्रकार से वण होने पर सवपा तथा न होने पर अव्रण ऐसे प्रकार किये जाते है । रह्यमान व्रगा _ वण कपोत वर्णीय ...
5
Vājasaneyi-mādhyandina śuklayajurveda-saṃhitā: ... - व्हॉल्यूम 8
... तो अव्रण तथा अनाज ये विशेषण व्यय हो जायेंगे । क्योंकि स्कूल शरीर के होने पर ही वणादि संभव हैं । तीनों शरीरों से रहित में तो ब्रणादिक जब संभव ही नहीं अर्थात् वणादि की प्राप्ति ...
Hariharānandasarasvatī (Swami.), Gajānanaśāstrī Musalagām̐vakara, 1986
6
Yūnānī cikitsāsāra; yūnānīmatena āśiraḥpāda sarva ...
... जनित 1, मैथुनज ,, रक्तज ,, रूक्षताजन्य वा वातज ,, वातजन्य शिर्वाक शिश्वाक्षेप शिश्वतिसार शीघ्रपतन शीतपित्त शीतला शुकाकाल्लेसान शुक्र (शुक्ल) हैं, ,, अव्रण शुक्र तारल्य शुक्रमेह ...
7
Bhāgavatāyana ashṭādaśastambhātmaka
जार तालु लख वकी सुर्भयया त्वरित सु उगलेउ लला कन्हैया : लख अव्रण प्रभु अंग जु सोहा । धायेउ खल तदयपि उर कोहा । संतन गति हरि मातुल कंसा । जान मित्र उर कृपा प्रसंसा है अज चंच-गहि एक जु ...
9
Vaidika siddhānta ratnāvalī
... निराकार अर्थात आकार वाला कभी नहीं होता, अकाय अर्थात शरीर कभी नहीं धारा, अव्रण अर्थात् जिसमें छिद्र कभी नहीं होता, जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध वाला कभी नहीं होता, जिसमें जो ...
10
Brahmajijñāsā in the light of Upaniṣad: - पृष्ठ 79
ध्यातव्य है कि अव्रण तथा अस्ताविर इन दो विशेषणों से ब्रह्म के रथूल शरीर का ही निषेध किया गया है, क्योंकि उक्त दोनों विशेषणों का अन्याय एकमात्र रुथूल शरीर में ही हो पायेगा ।