अंधेरे का रेल राजा" इकेगामी लाइन के पिता #111
परिचय (Introduction)
कामाता का विकास
शोबुएन उद्यान के खुलने
और
जेआर कामाता स्टेशन के उद्घाटन से हुआ।
विशेष रूप से,
इकेगामी इलेक्ट्रिक रेलवे
(वर्तमान में टोक्यू इकेगामी लाइन)
ने आज के जंक्शन स्टेशन की नींव रखी।
इस मार्ग
की स्थापना की प्रक्रिया
अत्यधिक बाधाओं से
भरी थी।
लेकिन इसे
केवल एक ही व्यक्ति द्वारा सच किया गया,
जिसे "ओटा-कु का अनजाना नायक" कहा जाता है।
हम उस व्यक्ति के प्रभाव का अनुसरण करेंगे,
जिसने इकेगामी लाइन में योगदान दिया।
अंधेरे का रेल राजा
(The Dark Railway King)
ताकायानागि जुन्नोसुके (Junnosuke Takayanagi)
जन्म: 16 अक्टूबर 1882 - मृत्यु: 17 नवंबर 1964
वह
इबाराकी प्रान्त के एक व्यापारी,
राजनीतिज्ञ और लेखक थे,
और साथ ही
एक धोखेबाज भी थे।

व्यक्तिगत विवरण और रणनीति
(Personal History and Strategy)
1920:
प्रतिनिधि सभा के सदस्य चुने गए।
उसी वर्ष:
जोतो इलेक्ट्रिक रेलवे को लक्षित किया।
उन्होंने पहले शेयर खरीदे
फिर प्रबंधन को
उन्हें ऊंचे दाम पर वापस खरीदने के लिए
मजबूर किया,
जिससे 200,000 येन का लाभ हुआ
(उस समय यह एक बड़ी राशि थी)।
उनका तरीका:
संकटग्रस्त कंपनियों
को "पुनर्जीवित" करने के लिए
निवेशकों से पूंजी जुटाना।
— यह आज के फंडों के समान था,
लेकिन तरीके अक्सर संदिग्ध होते थे।
1921–1925:
धन जुटाने के लिए
कई शेल कंपनियाँ (पेपर कंपनियाँ) स्थापित कीं।
— यह "अंधेरे के ताकायानागि" के उदय का संकेत था।
1925:
कुलीन सदन के सदस्य चुने गए।
1935:
धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराए गए।
और उनके राजसी सम्मान छीन लिए गए।
उसके बाद, वह जनता की नज़रों से गायब हो गए।

इकेगामी रेलवे की दृढ़ता
(The Persistence of Ikegami Railway)
10 साल की देरी (10 Years of Delay)
1912:
मात्सुकाता गोरौ
और अन्य पहलकर्ताओं ने
पहली रेलवे लाइसेंस के लिए
आवेदन किया।
योजना इकेगामी के माध्यम से
मेगुरो (目黒) और ओमोरी (大森) को जोड़ने की थी।
1914–1917:
मंजूरी में 2 साल लगे।
लगातार वित्तीय समस्याओं
और पहलकर्ताओं की गिरती विश्वसनीयता के कारण,
निर्माण शुरू करने की अनुमति में और देरी हुई।
1917: 5
साल से अधिक के बाद, कंपनी अंततः स्थापित हुई।

इकेगामी इलेक्ट्रिक रेलवे के शुरू में नियोजित मार्ग (बैंगनी बिंदीदार रेखा) और
वर्तमान मार्ग का तुलनात्मक आरेख
(डेटा स्रोत: XWIN II वेब्लॉग, लेख:
"इकेगामी इलेक्ट्रिक रेलवे की इकेगामी-कामाटा शाखा लाइन के
उद्घाटन के 90 साल")
मार्ग परिवर्तन
(Route Change)
ओमोरी के पास जमीन खरीदने में समस्याएँ आईं।
1918:
कंपनी ने योजना बदली
और इकेगामी-कामाटा शाखा लाइन के लिए
लाइसेंस प्राप्त किया।
— यह मूल ओमोरी मुख्य मार्ग की जगह लेने वाला
महत्वपूर्ण परिवर्तन था।
1921:
अंततः आधारशिला समारोह हुआ,
लेकिन प्रगति धीमी रही।
कारण लगातार धन की कमी।
इस दीर्घकालिक वित्तीय समस्या
ने पूरे प्रोजेक्ट में बाधा डाली।
ताकायानागि की "उद्धारकर्ता" गति
(Takayanagi’s "Savior" Speed)
■ अधिग्रहण और उद्घाटन
(Seizure and Opening)
1921:
ताकायानागि ने संभावित लाभ को पहचाना
और शेयर खरीदना शुरू किया।
अप्रैल 1922:
ताकायानागि ने प्रतिद्वंद्वियों को हटाया
और प्रबंधन नियंत्रण ले लिया।
उन्होंने इस रुके हुए प्रोजेक्ट
को अक्टूबर में त्योहार से पहले
परिचालन शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
नई ट्रेनों की आपूर्ति असंभव थी,
इसलिए उन्होंने जल्दी से सुन्एन इलेक्ट्रिक रेलवे से
2 पुरानी ट्रेनें उपयोग में लाईं।
उल्लेखनीय यह है कि,
जब ये ट्रेनें चलीं,
तो उन पर पुराना नाम
अभी भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।
6 अक्टूबर 1922:
10 साल की योजना के बाद,
कामाटा–इकेगामी खंड का उद्घाटन हुआ।
आश्चर्यजनक रूप से, ताकायानागि के नेतृत्व में,
यह केवल 6 महीने में पूरा हुआ।
महत्वपूर्ण बात यह है कि,
कामाटा में इस परिवर्तन ने इकेगामी लाइन को
पहला अंतिम स्टेशन के रूप में स्थापित किया।
कमियां (The Flaws)
इस गति के लिए
कम लागत पर निर्माण करना आवश्यक था।
— जो अक्सर
परिवहन मंत्रालय के मानकों के अनुरूप नहीं था।
उनके द्वारा स्थापित अधिकांश धन उगाहने वाली कंपनियाँ
शेल कंपनियाँ (पेपर कंपनियाँ) थीं।
इन कंपनियों का उपयोग
रेलवे को वित्तपोषित करने के बजाय,
उनकी व्यक्तिगत संपत्ति
जमा करने के लिए किया जाता था।
स्वाभाविक रूप से,
उनके "उद्धारकर्ता" का मुखौटा
जल्द ही उतर गया।
पतन और विरासत
(Downfall and Legacy)
घोटाला (Scandal)
सितंबर 1925:
ताकायानागि की अस्पष्ट वित्तीय समस्याएँ उजागर हुईं।
इसमें धोखाधड़ी,
भारी गबन और दस्तावेज़ों की जालसाजी शामिल थी।
— यही वह "ताकायानागि मामला" था
जिसने उन्हें जेल की ओर अग्रसर किया।
दिसंबर 1925:
उन्हें निदेशक पद से
इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।
पुनरावलोकन
(Retrospective)
ताकायानागि की शक्ति द्वारा बचाए जाने से पहले,
इकेगामी इलेक्ट्रिक रेलवे लगभग विफल होने वाली थी।
उनका जुड़ाव केवल 5 साल की संक्षिप्त अवधि के लिए था।
हालांकि,
यह वही अवधि थी जिसने
आज की इकेगामी लाइन की अटूट नींव रखी।
यह मार्ग बाद में 1976 (शोवा 51)
में जारी गीत "इकेगामी-सेन (池上線)" के माध्यम से भी
व्यापक रूप से जाना गया।
निष्कर्ष: सभी से राय आमंत्रित है
(Conclusion: Request for Everyone’s Opinion)
ताकायानागि में महान खूबियाँ थीं,
लेकिन उन्होंने गंभीर अपराध भी किए।
ऐसे व्यक्ति का मूल्यांकन करते समय,
क्या आप उन्हें "वीरपुत्र" (नायक) कहेंगे,
या "बुरा आदमी" (दुष्ट)?
कृपया अपने दृष्टिकोण को साझा करें!
हम आशा करते हैं कि
हमें
"इकेगामी लाइन के पिता" द्वारा छोड़ी गई विरासत
के बारे में आपकी बहुमूल्य राय मिलेगी।
दिल से अंतर्दृष्टि साझा करने के लिए धन्यवाद।

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